सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का अध्ययन : छात्रों के विशेष सन्दर्भ में

Authors

  • डॉ. अजय कुमार प्रजापति श्री विक्रम चौहान स्मारक महाविद्यालय रामपुर भुजही, आजमगढ़ (उ.प्र.) Author

DOI:

https://doi.org/10.68677/amij.v1i2.03

Keywords:

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन, छात्र, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया

Abstract

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की घोषणा अक्टूबर 2009 में की गयी थी। इस मूल्यांकन का उद्देश्य छात्रों पर कार्य का दबाव कम करना, मूल्यांकन की प्रक्रिया को सतत बनाना व विभिन्न कौशलों और क्षमताओं के आकलन को सुधारना था। नीति निर्धारकों का यह मानना था कि इससे छात्रों की परीक्षा से सम्बन्धित दबाव व तनाव कम होगा और यह मानना भी था कि इससे अपव्यय व अवरोधन की समस्या पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसको लागू करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को करके सीखने पर जोर देना तथा किताबी ज्ञान की प्राचीन प्रणाली को कम करना था। यह प्रणाली छात्रों को स्वयं करके सीखने के लिए प्रेरित करेगी जिससे अधिगम प्रभावी होगा और विद्यार्थी अच्छे से सीख सकेंगे। ऐसा नीति निर्धारकों का मानना था।

इस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक था कि सर्वप्रथम विद्यार्थियों व अभिभावकों को इस प्रणाली के उद्देश्यों व इसकी उपादेयता से अवगत कराया जाता। साथ ही शिक्षकों को भी विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों द्वारा इन क्रियाओं के सम्पादन में पारंगत किया जाता, जिससे इन पाठ्य एवं पाठ्यसहगामी क्रियाओं का मूल्यांकन प्रभावी ढंग से हो पाता। परन्तु यह नीति अपने व्यावहारिक पक्ष में सफल होती प्रतीत नहीं हुई। समय-समय पर विभिन्न जन माध्यमों द्वारा इस नीति के प्रति असंतोष भी परिलक्षित किया गया। प्रस्तुत शोध पत्र इसी दिशा में एक समाधान ढूँढ़ने का प्रयास है।

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Published

2026-09-30

How to Cite

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का अध्ययन : छात्रों के विशेष सन्दर्भ में. (2026). The Academic Matrix International Journal, 1(2), 13-19. https://doi.org/10.68677/amij.v1i2.03