डिजिटल युग में अनुसंधान की मौलिकता का संरक्षण : कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान नैतिकता एवं साहित्यिक चोरी की रोकथाम का समकालीन विश्लेषण

Authors

  • डॉ. वंदना श्रीवास्तव सहायक आचार्य (शिक्षाशास्त्र) Author

DOI:

https://doi.org/10.68677/amij.v1i2.07

Keywords:

डिजिटल अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान नैतिकता, मौलिकता, साहित्यिक चोरी, शैक्षणिक सत्यनिष्ठा, डिजिटल नैतिकता, अकादमिक लेखन।

Abstract

इक्कीसवीं शताब्दी में डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीव्र विकास ने अनुसंधान की प्रकृति, पद्धति तथा ज्ञान-सृजन की प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन किए हैं। डिजिटल पुस्तकालयों, मुक्त अभिगम ऑनलाइन डेटाबेस तथा जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित लेखन उपकरणों ने शोधार्थियों के लिए ज्ञान-संसाधनों तक पहुँच को अत्यंत सरल एवं तीव्र बना दिया है। दूसरी ओर, इन तकनीकों के अनियंत्रित अथवा अनुचित उपयोग ने अनुसंधान की मौलिकता, शैक्षणिक सत्यनिष्ठा तथा बौद्धिक उत्तरदायित्व के समक्ष नई चुनौतियाँ भी उत्पन्न की हैं। वर्तमान समय में साहित्यिक चोरी केवल शब्दों की नकल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि एआई-जनित सामग्री, अनुचित पैराफ्रेज़िंग, स्रोतों का अपूर्ण उल्लेख तथा डिजिटल सामग्री के अनैतिक उपयोग जैसे अनेक नए आयाम सामने आए हैं।

प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य डिजिटल युग में अनुसंधान की मौलिकता के समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण करना तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान नैतिकता, संस्थागत नीतियों एवं शोधकर्ता-केंद्रित रणनीतियों के माध्यम से साहित्यिक चोरी की रोकथाम के प्रभावी उपायों का समकालीन अध्ययन प्रस्तुत करना है। यह अध्ययन गुणात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध-पद्धति पर आधारित है तथा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय साहित्य, नीति-दस्तावेजों और अनुसंधान नैतिकता संबंधी स्रोतों के समालोचनात्मक अध्ययन पर केंद्रित है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल युग में केवल तकनीकी जाँच पर्याप्त नहीं है, बल्कि नैतिक चेतना, आलोचनात्मक चिंतन, पारदर्शी लेखन तथा उत्तरदायित्वपूर्ण कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की संस्कृति विकसित करना समय की प्रमुख आवश्यकता है।

Downloads

Published

2026-09-30

How to Cite

डिजिटल युग में अनुसंधान की मौलिकता का संरक्षण : कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान नैतिकता एवं साहित्यिक चोरी की रोकथाम का समकालीन विश्लेषण. (2026). The Academic Matrix International Journal, 1(2), 39-47. https://doi.org/10.68677/amij.v1i2.07